जेडी(यू) के एक अन्य नेता नदीम अख्तर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वह वक्फ संशोधन विधेयक को पार्टी द्वारा समर्थन दिए जाने के कारण पार्टी छोड़ने वाले पांचवें सदस्य बन गए हैं। उनके इस्तीफे के बाद जेडी(यू) नेता राजू नैयर, तबरेज सिद्दीकी अलीग, मोहम्मद शाहनवाज मलिक और मोहम्मद कासिम अंसारी सहित चार अन्य नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले जेडी(यू) नेता राजू नैयर ने अपने इस्तीफे में लिखा था, “वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित होने और उसका समर्थन किए जाने के बाद मैं जेडी(यू) से इस्तीफा देता हूं।”
वहीं, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा का इस पर बड़ा बयान आया है। संजय झा ने कहा कि जिन मुस्लिम नेताओं ने वक्फ बिल के विरोध में जदयू से इस्तीफा देने का ऐलान किया है, उन्हें वह खुद नहीं जानते। उन्होंने कहा कि वक्फ बिल वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन को दूर करने के लिए लाया गया था। बिहार में हुई जाति जनगणना में पसमांदा मुसलमान, अंसारी, मंसूरी समुदाय शामिल हैं, और इस बिल से उन्हें लाभ होगा क्योंकि उनके प्रतिनिधि भी इस बोर्ड में होंगे। वक्फ के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ऐसा किया गया है।
केंद्रीय मंत्री और जेडीयू सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने कहा कि जिस नेता ने पार्टी (जेडीयू) से इस्तीफा दे दिया है, उसने पतंग (एआईएमआईएम) के चुनाव चिन्ह पर ढाका (बिहार) से 2020 का चुनाव लड़ा और 499 वोट हासिल किए। ऐसे में भारी नेता कहा। आरजेडी को लालू यादव के 2010 के भाषण पर बोलना चाहिए, जहां उन्होंने कहा था कि उन्होंने (वक्फ) डाक बंगले के पास की जमीन सहित सब कुछ लूट लिया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भाजपा के सहयोगी दलों और सांसदों समेत सभी धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों से वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने का आग्रह किया था। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को संबोधित एक पत्र में, तबरेज़ सिद्दीकी अलीग ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने मुस्लिम समुदाय के विश्वास को धोखा दिया है। मोहम्मद कासिम अंसारी ने कहा कि वे इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि वक्फ संशोधन विधेयक पर पार्टी के रुख ने लाखों मुसलमानों को “गहरी ठेस” पहुंचाई है। यह इस्तीफा जेडीयू के लिए ऐसे समय में आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है।